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Good Friday क्या है और इसे क्यों और कैसे मनाते हैं

 Good Friday को black Friday के नाम से भी जाना जाता है। हर साल good Friday Easter से ठीक पहले के Friday को मनाया जाता है।



 आज हम good Friday से संबधित सभी चीजों को जानेंगे कि good Friday क्यों और कैसे मनाया जाता है। हम good Friday को मानने का महत्व भी जानेंगे।

Good Friday क्या है? 

हर साल good Friday अलग अलग तारीख को मनाया जाता है। Good Friday Easter के ठीक पहले आने वाले Friday को कहते हैं । वैसे तो good Friday दुख और शोक का त्योहार है क्योंकि इस दिन ईशा मसीह को क्रूज पर चढ़ाया गया था इसलिए इस दिन कोई भी ईसाई एक दूसरे को बधाई नहीं देता। Good Friday को केवल एक पवित्र दिन के रूप में मनाया जाता है ना कि अच्छे दिन के रूप में।

Good Friday को हिंदी 'पूर्ण शुक्रवार' भी कहते हैं । 

Good Friday क्यों मनाया जाता है?

Good Friday मनाने की शुरुआत 40 दिन पहले होती है, और हर साल good Friday  कब मनाया जाएगा इसको Roman Catholic ki सबसे बड़ी संस्था तय करती है यानी वेटिकन सिटी , क्योंकि यहां ईसाई समुदाय के pope रहते हैं।

Good Friday से 40 दिन पहले ash Wednesday होता है यानी राख बुधवार। Ash wednesday के दिन चर्च में स्पेशल prayer होती है और इस दिन सभी लोग अपने सिर में राख मलते हैं जो इस बात को संकेत देता है कि हम मिट्टी के बने हैं और मिट्टी में ही मिल जाएंगे।

इन 40 दिनों के दौरन चर्च और ईशा मसीह में विश्वास रखने वाले लोग उपवास रखते हैं और हर शुक्रवार को विशेष prayer होती  है। इन 40 दिनों में लोग अध्यात्मक जीवन की तरफ लौटने , अपने गुनाहों के लिए क्षमा मांगते हैं। 

Good Friday को कैसे मनाते हैं?

इस 40 दिन का अंतिम week holy week के नाम से जाना जाता है। Good Friday के पहले वाले Sunday से holy week ki शुरुआत होती है और इस sunday को palm Sunday यानी खजूर Sunday भी कहा जाता है। 

मान्यता है कि करीब 2000 साल पहले Jesus Christ Jerusalem आए थे तो उनका सुआगत राजा की तरह हुआ था। लोगो ने उनके शुआगत में केले के पत्ते बिछा दिए था इसलिए palm Sunday मनाया जाता है।

इसलिए palm Sunday को ईसाई लोग खजूर के पत्ते लिए चर्च पहुंचते हैं और राजा की तरह Jesus Christ Ka welcome करते हैं।

Good Friday से पहले का दिन maunday Thursday कहलाता है। यहूदी जाति में पैदा होने से Jesus Christ ने भी इसी दिन अपने शिष्यों के साथ भोजन किया और उनके पैर धोए। 

इसलिए Thursday को चर्च के पोप एवम् पादरी लोगो के पैर धोते हैं क्योंकि ऐसा ही उन्हें Jesus Christ ने सिखाया था। 

जूडस और good Friday Ka क्या कनेक्शन है?

माना जाता है कि मरने से एक दिन पहले ही Jesus Christ ने अपने शिष्यों के साथ खाना खाया जो कि last supper के नाम से जाना जाता है और उन्होंने कहा कि उनमें से एक है जो उन्हें पकड़वा देगा और ऐसा उन्होंने जूडस के बारे में ही कहा था। 

बता दें कि जूडस Jesus के 12 शिष्यों में से एक था और Jesus के काफी करीब था। भोजन के दौरान Jesus ने हाथ में एक ब्रेड लिया और कहा कि जिसे भी मै ब्रेड का टुकड़ा दूंगा वही मेरे साथ गद्दारी करेगा और इसके बाद उन्होंने बो टुकड़ा जूडस के हाथो में सौंप दिया और जूडस ने धर्म अधिकारियों से 30 चांदी के सिक्कों के बदले Jesus Christ Ka सौदा कर लिया। 


बाइबल के अनुसार जब Jesus Christ शिष्यों के साथ prayer कर रहे थे तब जूडस धर्म अधिकारियों के साथ आया और उसने कहा कि जिसके भी उपर मै हाथ रखूंगा वही Jesus होंगे। इस प्रकार जूडस ने धर्म अधिकारियों के हाथो Jesus को पकड़वा दिया।

हालांकि जब जूडस को पता चला कि उसके ही कारण Jesus को सजा मिली है तो उसे अपनी करनी पर पछतावा हुआ, जूडस ने कहा कि उसने एक निर्दोष रक्त का सौदा किया है इसलिए उसने बो 30 चांदी के सिक्के वापिस भी करने चाहे लेकिन अधिकारियों ने  सिक्के बापस नहीं लिए। 

इसके बाद जूडस ने वो 30 सिक्के चर्च में फेंक दिए और अपने आप को फांसी लगा ली। इन 30 सिक्कों से महायोजकों ने जमीन खरीदी और आज भी बह जमीन रक्त की जमीन कहलाती है यानी 'land of blood'. 

यह सब हुआ good Friday के दिन Jesus को क्रूज पर चढ़ाने से पहले। Jesus जानते थे कि उनका सिष्य जूडस उन्हें धोखा देगा पर फिर भी उन्होंने जूडस को नहीं रोका।

Jesus के बारे में बाइबल में कहा गया है कि वो लोगो को चंगा करते , उनके घाऊ भरते और शांति का उपदेश दिया करते थे। लेकिन ये सब नेताओं को अच्छा नहीं लगता था इसलिए उन्होंने Jesus के खिलाफ उन्हें जान से मारने कि साजिश रची। 

क्योंकि Jesus खुद को भगवान का पुत्र मानते थे इसलिए उन पर भगवान की निन्दा करने का आरोप लगा और उन्हें प्राण दंड दिया गया। उन्हें राज्यपाल के सामने लाया गया, राज्यपाल को निर्णय लेने का अधिकार था और वो जानता था कि Jesus को षड्यंत्र के तहत पकड़वाया गया है पर भीड़ के सामने उसकी एक ना चली।

भीड़ राज्यपाल से Jesus को क्रूज पर चढ़ान के मांग कर रही थी तो राज्यपाल ने ना चाहते हुए भी Jesus को कोड़े लगवाकर उन्हें क्रूज पर चढ़ाने का हुक्म दिया। 

बाइबल में कहा गया है कि Jesus Christ के सिपाहियों ने कपडे उतारे और उन्हें लाल कपडे पहनने को दिए, Jesus को कोड़े मारे और कांटो का मुकुट उनके सिर में लगाया गया। और अंत में Jesus को क्रूज पर चढ़ा दिया गया, उनके हाथ पैर में कीलें ठोकिं गई और अंत में ईशा मसीह ने अपने प्राण त्याग दिए। 

निर्दोष होते हुए भी ईशा मसीह को क्रूज पर चढ़ाया गया। ईसाई लोगों की मान्यता है कि ईशा मसीह लोगो के पाप के कारण क्रूज पर चढ़े। क्रूज पर पीड़ा सहते हुए ईशा मसीह ने कहा था ' हे परमपिता भगवान उन्हें क्षमा करना क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं'

ईशा मसीह को याद करते हुए सभी लोग good Friday मनाते हैं और ईसाई समुदाय का यह भी मानना है कि 3 दिन कब्र में रहने के बाद यानी easter Sunday को ईशा मसीह फिर से जिंदा हुए थे। 

बे अलग अलग मौकों पर अपने शिष्यों को दर्शन देते रहे और उन्होंने दर्शन देते हुए अपने शिष्यों को कहा कि वो उनका संदेश दूसरे लोगो तक पहुंचाए इसलिए ईसाई सुदाय में पादरी की लोग पूजा करते हैं और पादरी को ईशा मसीह का पैगम्बर मानते हैं।

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