Israel और Palestine के विवाद के मुख्य कारण, Conflict between Israel and Palestine In Hindi

25 साल पहले शांति के बिल्कुल करीब पहुंचकर भी क्यों आज भी Israel और Palestine कायम है नफरत की जंग, Israel और Palestine के बीच जंग कि क्या है वजह। आज हम israel और Palestine का इतिहास जानेंगे जिससे हमें इनके वर्तमान कंडीशन की वजह पता चल सके।

Israel और Palestine की Geographical Location

Israel Asia का एक छोटा सा देश है जो कि Mediterranean Sea के किनारे बसा हुआ है। Israel Asia और अफ्रीका continent के बॉर्डर पे है। इसके ईस्ट में जॉर्डन , नॉर्थ में लेबनॉन और साउथ में Egypt है। इसके मध्य में स्थित है Palestine. Israel की ज्यादातर जनसंख्या Jews, Muslims और Chirstian हैं।

Palestine का इतिहास

बात उस समय की है जब अंग्रेज़ी हुकूमत पूरे विश्व पे हुकूमत करती थी। उस समय ये Israel, Jordon, Palestine और कुछ देश ottoman Empire के अन्तर्गत आते थे।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब हिटलर Jews पे अत्याचार कर रहा था तब England ne Balfour declaration के तहत Jews को उनका अलग देश देने का फैसला किया जो कि Palestine के नाम से जाना जाएगा। और साथ में फ्रांस और अरब देशों से भी Palestine देने का वादा किया क्योंकि उसे फर्स्ट वर्ल्ड वार में जर्मनी को हराने के लिए support की जरूरत थी।

अब जब फर्स्ट वर्ल्ड वार ख़तम हुआ तो 1920 में Ottoman Empire को तोड दिया गया जो की फ्रांस और इंग्लैंड ने किया था। लेकिन Palestine area abhi तक किसी को भी नहीं दिया गया था और उसे disputed area घोषित कर दिया गया।

1920 में League of Nation का गठन हुआ। 1922 में League of Nation के द्वारा Palestine को ब्रिटेन को सौंप दिया गया। अब बाकी देश भी ब्रिटेन से Palestine की मांग करने लगे लेकिन ब्रिटेन ने किसी को भी देने से इंकार कर दिया और Palestine को education provide करने का डिसीजन लिया। लेकिन अलग अलग समुदाय होने के कारण Palestine को दंगो को सामना करना पड़ा । अलग अलग समुदाय को लोग आपस में लडने लगे ।

इंग्लैंड हमेशा चाहता था कि मिडिल ईस्ट जिसमें 17 देश आते हैं ये हमेशा disputed यानी इसमें लड़ाई झगड़े चलते रहे। इसकी वजह थी मिडिल ईस्ट देशों के पास पेट्रोलियम और coal के भंडार। एसा करके इंग्लैंड हमेशा मिडिल ईस्ट पे अपना दबदबा कायम रख सकता है और जो पेट्रोल और coal है उसे आसानी से मिलता रहे।

Second World war के बाद Palestine की स्थिति

Second World war के अंत में US, France और ब्रिटेन की जीत हुई और साथ में UNO (United Nation Organisation ) का गठन हुआ। अभी भी Palestine के अंदर लड़ाई झगड़े चल रहे थे। जैसा कि 1922 में League of Nation ने Palestine को ब्रिटेन को दिया था इसी तरह Palestine को इंग्लैंड ने UNO को से दिया।

UNO के द्वार 1947 में Palestine को 3 हिस्सों में बाट दिया गया। 44 परसेंट हिस्सा Jews को दे दिया गया, 55 परसेंट हिस्सा अरब देशों को और 1 परसेंट जो को जेरूसलम है बो UN ने अपने पास रख लिया।

अब जो नक्शा UNO ne Palestine बनाया बो खुद में एक disputed map था। उन्होंने Palestine को दो हिस्सों में तोड दिया। थोड़ा उपर फिर बीच में Israel और फिर बचा हुए Palestine. असल में UN को Palestine का मसला सुलझाना नहीं था इसलिए UN ने इस तरह का नक्शा बनाया जो आज भी Palestine और Israel की लड़ाई का जड़ बना हुआ है।

UNO के इस decision का दुनिया भर में विरोध हुआ लेकिन Israel के Jews को इससे कोई मतलब नहीं था क्योंकि उन्हें एक बना बनाया देश मिल गया था। 1948 में इंग्लैंड ने भी अपनी सेना वापस बुला ली क्योंकि इंग्लैंड भी UN के इस निर्णय का support कर रहा था। अभी जो israel देश है बो पहले का Palestine है जो की राजनीतिक षड्यंत्र की वजह से Israel देश बन गया।

अब situation कुछ इस तरह की थी, 55 percent हिस्सा Palestine का है जिसपे अरब का कब्जा है और 44 परसेंट हिस्सा Israel का है जिसमें Jews रहते हैं।

Palestine और Israel में विवाद कैसे शुरू हुआ?

अरब जिनका कब्जा Palestine पे था बो isreal यानी की Jews से चिढ़ते थे। विवाद का मुख्य कारण था जेरूसलम जो israel का कैपिटल भी है। जेरूसलम में तीन धर्मों का पवित्र स्थान है।

जेरूसलम के बैकलाहाम में ईशा माशिह पैदा हुए थे जो कि ईसाई लोगों के भगवान हैं। उसी जगह Jews को भी बसा दिया गया क्योंकि Jews का सबसे पुराना पूजा स्थल welling wall या वेस्टर्न वॉल जेरूसलम में है। और मुसलमानों का मस्जिद जहां से मुस्लिम धर्म गुरु Mohammad Shab स्वर्ग में गए थे बो मस्जिद भी जेरूसलम में ही है।

इस तरह जेरूसलम तीन धर्मों का पवित्र स्थान है और जिसपे कब्जा है UN का। अब सभी अरब देशों ने isreal पे हमला करने के प्लान बनाया। और 1948 में आस पास के 6 अरब देशों ने अकेले छोटे से Israel पे हमला कर दिया जिसमें Jews रहते थे। Jews को मालूम था कि अगर इस युद्ध में बो हर जाते हैं तो विश्व से ही उनका नाम मिटा दिया जाएगा क्योंकि केवल Israel देश ही था Jews का और अगर बो भी चला गया तो Jews ख़तम।

बता दें कि isreal देश छोटा था मगर Jews के पास पैसा और तकनीकी दोनों थे। उधर अरब देशों के पास ना तो पैसा था और ना ही किसी तरह की तकनीकी। अतः युद्ध का परिणाम Isreal के पक्ष में गया। इस ने ना सिर्फ युद्ध जीता बल्कि अपना Area 80 percent बढ़ा लिया। अब Israel का कुल area 34000 Sq Km तक हो गया।

इस युद्ध को जीतने के बाद israel का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके बाद israel ने कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा । जब से israel देश बना है, तब से अब तक उसने 5 युद्ध लड़े और सभी 5 युद्ध जीत भी लिए।

Suez Canal युद्ध Isreal और अरब देशों में

बता दें कि Suez canal trade की दृष्टि से बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एशिया के देशों और मिडिल ईस्ट के देशों हैं में आसानी से trade होता है। Suez canal Egypt के किनारे पे स्थित है और ये Canal France की एक कंपनी ने बनाया था।

लेकिन 1955 में इसे Egypt के राष्ट्रपति नासिर हुसैन ने इस canal को नेशनालाइज कर दिया यानी की अब से इस canal पे Egypt का हक होगा और जो देश इस canal से trade करेगा उसे Egypt को टैक्स देना होगा। साथ में जैसे की सभी अरब देश Israel के दुश्मन थे इसलिए Egypt ने यह ऐलान किया कि इस canal का उपयोग इजरायल नहीं कर सकता ।

इससे इजरायल के व्यापार को काफी बड़ा झटका लगा क्योंकि अगर Suez canal से नहीं जा सकते तो उन्हें अफ्रीका को पार करके जाना होगा जो कि लगभग 5 गुना ज्यादा है। ऐसे में Israel के पास युद्ध के अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता बचा ही नहीं।

युद्ध शुरू होने से पहले इजरायल ने इंग्लैंड से सलाह मांगी क्योंकि इंग्लैंड के ही कारण इजरायल का जन्म हुआ था। इंग्लैंड ने इजरायल को Sinai Peninsula पे हमला करने जो कहा। बता दें कि sinai पहले Egypt का ही हिस्सा था लेकिन जब suez canal बना तब वह Egypt से पूरी तरह अलग हो गया हालांकि Sinai पे अधिकार अभी भी Egypt का ही है।

इजरायल ने Sinai पे हमला और एक झटके में ही उसपे कब्जा कर लिया। और जब Egypt ने इजरायल पे हमला किया तो बचाव में ब्रिटेन और फ्रांस। अब Egypt को Russia के पास मदद के लिए जाना पड़ा । Russia के पास उस समय भी परमाणु ताकत थी। ऐसे में समझौता हुआ कि इजरायल Sinai को छोड़ देगा और बदले में Isreal को Suez canal से Trade करने की अनुमति होगी।

इस युद्ध को भी Israel जीत गया क्योंकि इजरायल ने युद्ध Suez canal से trade करने के लिए ही किया था और अब उसे यह अनुमति मिल चुकी थी।

6 Day War , 6 दिन युद्ध

ये 6 दिन युद्ध नीति इजरायल की बहुत प्रसिद्ध है। कहते हैं कि इजरायल ने 6 दिन में सभी मिडिल ईस्ट के countries को हराया था। इस युद्ध की शुरुआत Egypt के द्वारा की गई थी 1967 में। बता दें कि इस युद्ध का मुख्य कारण भी Suez canal था। इस युद्ध में लेबनान, जॉर्डन, सीरिया और Egypt एक तरफ थे और दूसरी तरफ अकेला इजरायल।

ऐसे में Israel के रक्षा मंत्री थे Moshe Dyam जिन्होंने 1948 में मुख्य भूमिका निभाई थी। 6 दिन की युद्ध नीति इन्हीं की थी। युद्ध शुरू होते ही सबसे पहले इसराइली एयरफोर्स ने Egypt के एयरफोर्स पर धावा बोल दिया और सब कुछ तहस नहस हो गया। फिर इजरायल ने लेबनॉन को हरा दिया । अब बारी थी जॉर्डन की। जॉर्डन के करीब 20000 लोग इस युद्ध में मारे गए। बाद में Israel ने सीरिया को भी हरा दिया और युद्ध के अंत में Israel ने Egypt के गाजा पट्टी को हथिया लिया।

Golan Heights

बता दें कि जब ये युद्ध समाप्त हुआ तब इजरायल को गाजा पट्टी तो मिली है , साथ में मिला गोलान Heights. Golan heights एक पर्वत है जो 4 देशों की सीमा पे स्थित है लेबनान, सीरिया, इजरायल और जॉर्डन। अब गोलान Heights का महत्व ये था की गोलान Heights से किसी भी पड़ोसी देश पे आराम से हमला किया जा सकता था और इजरायल युद्ध जीत सकता था।

गोलान Heights का इजरायल को सबसे बड़ा फ़ायदा पानी का था। इजरायल हमेशा से पानी के लिए परेशान था और गोलान Heights के आ जाने से पानी कि समस्या भी हल हो गई। अब मिडिल ईस्ट के देशों में Israel का भय कायम हो गया।

इसके बाद इजरायल ने yom-kippur और लेबनॉन वार of 1982 लड़ा और इन दोनों युद्ध को इजरायल ही जीता। लेबनॉन का युद्ध इतना भयंकर हुआ था कि इसमें 30000 बेगुनाह लोग लेबनॉन के मारे गए थे। इस युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट के सभी देशों ने भविष्य में कभी भी Israel को देश का दरजा ना देने की कसम खाई। बता दें कि लेबनॉन के इस युद्ध ने HAMAS नामक संगठन को जन्म दे दिया।

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HAMAS क्या है?

HAMAS एक Palestine के लोगों का एक समूह है जिसका मकसद सिर्फ Palestine को इजरायल से आजादी दिलाने का है। लेकिन Israel इन्हें आतंकवादी मानता है और आए दिन इन्हें मारता रहता है।

Arial Sheron कौन था?

आपको बता दें कि इजरायल के हर व्यक्ति को तीन साल की military training provide कराई जाती है जिससे जरूरत पड़ने पर आम आदमी भी जंग में लड़ सके और अपना बचाव कर सके ।

Arial Sheron Israel की सेना में थे और आगे चलकर इजरायल के प्रधानमंत्री भी बने। बताया जाता है की Arial Sheron किसी भी Palestine व्यक्ति को मरवा देते थे जो Palestine की आजादी की मांग करता था। सन् 2000 में इन्होंने आसपास के देशों में नरसंहार किया । इन्होंने किसी बच्चे, बूढ़े, औरत , पुरुष को नहीं छोड़ा। जिस पे भी शक होता था Arial के द्वारा उसे मरवा दिया जाता था।

Palestine और Israel के विवाद का हल

विवाद बढ़ने का कारण है कि ना तो अरब देश झुकने को तैयार है और ना इजरायल बिना झुकाए मानेगा । अरब देश israel को देश की मान्यता नहीं दे रहे क्योंकि इजरायल अपनी देश की सीमाओं को फिक्स नहीं करना चाहता। ऐसे में यह हो सकता है कि इजरायल ने अरब देशों से जो जमीन कब्जाई है उसे बापस कर दे और अपनी सीमाएं फिक्स कर दे और बदले में अरब देश मिलकर इजरायल को एक देश की मान्यता दे दें।

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अभी पीछे यूएई ने ये समस्या सुलझाने के लिए कदम बढ़ाया है और कुछ Peace treaty भी साइन हुई।
लेकिन उससे कुछ फर्क पड़ा नहीं क्योंकि अभी अभी कुछ Palestine के लोगों को इजरायल ने मार दिया।

ऐसे में भारत को intiative लेने चाहिए और इस समस्या का हल निकालना चाहिए जिससे भारत एक ग्लोबल लीडर के रूप में आगे आयेगा।

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